समय कम है

पिछली गर्मियों में, मैं अपने दोस्त के दोस्त की शादी में गई थी और रिवाज़ के मुताबिक मुझे गुलदस्ता मिला। जब मैंने गुलदस्ते को मेज़ पर रखा, तो उसने (मेरे दोस्त ने) बड़े ही रूखेपन - और बिना किसी बात के कहा कि हम कपल नहीं हैं। यह एक बहुत ही खट्टी सी याद थी कि मैं वहाँ बस साथ देने और डांस के लिए गई थी, लेकिन मुझे नहीं लगता कि मुझे हाल-फ़िलहाल में अपना सफ़ेद गाउन पहनने की कोई उम्मीद बाँधनी चाहिए। हम सिर्फ़ दोस्त थे।

मुझे शादियाँ बेहद पसंद हैं। मैं अपने जीवन के उस कगार पर हूँ, जहाँ अब मैं साल में बस कुछ ही शादियों में जा रही हूँ। मुझे तैयार होना/सजना-संवरना और अपने प्रियजनों के साथ जश्न मनाना बहुत अच्छा लगता है और किसी भी दुल्हन की पार्टी में शामिल होना हमेशा से एक सम्मान की बात रही है। लेकिन जैसे-जैसे मेरी उम्र बढ़ रही है, परेशानी बढ़ती जा रही है।

लोग मुझे कहते रहते हैं कि सब्र का फल मीठा होता है। लेकिन मैं कब से प्रतीक्षा कर रही हूँ! अब तो मुझे लगता है कि मैं बाहर की दुनिया में कहीं फंस सी गई हूँ, जहाँ मुझे अकेले रहने के फायदे बताए जाते हैं लेकिन कोई भी दांपत्य जीवन के सुकून के बारे में नहीं बताता जिसमें मेरे कई दोस्त बंधते जा रहे हैं। मुझे नहीं पता कि मैं कब या शायद कभी इसका हिस्सा बन भी पाऊँगी। मेरे लिए अकेले होने का यह सबसे दुखद हिस्सा है।

मुझे नहीं पता कि मैं कब या शायद कभी इसका हिस्सा बन भी पाऊँगी। यह सोच मुझे आहत करती है।

मुझे गलत न समझें, यकीनन इसके कुछ फायदे भी हैं। मैं खुश हूँ कि मैं जो करना चाहूँ, जब करना चाहूँ, कर सकती हूँ और कोई मेरे किसी काम में खलल नहीं डालेगा, जब भी मूवी देखने के लिए लॉग इन करूं और मैं बिना किसी अपराध बोध के अपने पुरुष दोस्तों के साथ घूमने-फिरने जा सकती हूँ और न ही कोई मुझ पर शक करेगा कि मैं किसी की बीवी हूँ तो कोई क्या सोचेगा।

मुझे अपने दोस्तों के बच्चों के साथ खेलना बहुत अच्छा लगता है, लेकिन बहुत ही अकेलापन महसूस होता है जब बच्चा “माँ” पुकारता है और मेरी बाँहों से निकलकर अपनी माँ के पास चला जाता है। यह वास्तव में एक कड़वी सच्चाई है कि मैं दो लोगों के बिस्तर पर अकेली हूँ, भले ही कोई कभी मेरा कंबल न खींचे। मेरी तमन्ना है कि मेरा किसी से एक गहरा रिश्ता हो और मेरा भी अपना एक छोटा सा परिवार हो, लेकिन साथ ही साथ डर भी लगता है।

मैंने ऑनलाइन डेटिंग वेबसाइट आज़माई हैं, मैं काफी सोशल हूँ और अजनबियों से बात करती हूँ। मैंने यूनिवर्सिटी में पाँच साल बिताए हैं, जहाँ मेरे कई दोस्त मिले और उन्हें अपने जीवनसाथी से प्यार हो गया। मैं कई लोगों के साथ डेट पर गई हूँ और दर्जनों पुरुषों से मिली हूँ, लेकिन ऐसे बहुत ही कम थे जो मेरे इतने करीब हों कि मैं उसके साथ जीवन भर रहने का फैसला कर सकूं। और जो कुछ थे, मेरा अनुभव कहता कि वे उपलब्ध नहीं है, कम से कम मेरे लिए। मुझे कभी-कभी इतना अकेलापन महसूस होता है, जितना पहले कभी नहीं हुआ, पता नहीं ऐसा क्यों है (शायद ज़्यादा ही इमोशनल हो जाती हूँ): क्या ऐसा ही चलेगा? बस मैं, हमेशा के लिए? मैंने ऐसा क्या गलत किया है?

मैं अकेली रातों में अपने दिल के रोने की दास्ताँ सुन पाती हूँ कि मैं कहीं न कहीं असफल रही हूँ।

मुझे सही से नहीं पता कि ऐसी क्या चीज़ है जो मुझे दोस्तों से अलग करती है, जिन्हें प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी (कम से कम मेरी जितनी तो नहीं), लेकिन मैं अकेली रातों में अपने दिल के रोने की दास्ताँ सुन पाती हूँ कि मैं कहीं न कहीं असफल रही हूँ। क्या वे पतले हैं? सुंदर हैं? अच्छे लोग हैं? क्या उन्होंने हमेशा सही फैसले लिए हैं? या वो अपनी इच्छाओं को सीमित करके सेटल हो गए? क्या मैं बहुत ज़यादा मीन-मेख निकालती हूँ?

ऐसा नहीं है कि मेरा किसी से कभी कोई गहरा रिश्ता नहीं रहा। बाकी सब छोड़कर सिर्फ़ एक रिश्ते में, मैं खुद अलग हो गई थी। मुझे साथ में भविष्य के लिए प्यार और आशा दिखाई गई, जिससे मैं डर गई। या मैं खुदगर्ज़ थी। या मुझमें भावनाएँ नहीं हैं। या मैंने सही किया। ऐसा लगता है मैं कभी नहीं जान पाऊँगी।

मैं कुछ नहीं कर सकती लेकिन लगता है कि समय निकलता जा रहा है। मुझे अक्सर लगता है कि मेरे इर्द-गिर्द कपल हैं और मैं अकेली हूँ, लेकिन मैं अपने बारे में बहुत सी चीज़ें जान पा रही हूँ। यदि आप भी अकेलेपन से जूझ रहे हैं, तो अपनी संपर्क जानकारी नीचे दें। आप अपना असली नाम या फिर नकली नाम भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह आपकी मर्ज़ी है। हमारी टीम में से कोई आपसे जल्द संपर्क करेगा। आप अकेला महसूस कर सकते हैं, लेकिन आप अकेले नहीं हैं।

गोपनीयता के लिए लेखिका के संक्षिप्त नाम का ही उपयोग किया गया है।
फोटो साभार Joy Deb